शामली: पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सांप्रदायिक रूप से सुलगाने और हिंदू समाज में भ्रम पैदा करने की एक और बड़ी सोशल मीडिया साजिश का पर्दाफाश हुआ है। शामली के चर्चित दवा व्यापारी के बेटे आयुष मलिक के कथित धर्मांतरण को लेकर पहले से ही पूरे इलाके में भारी तनाव है, और इस मुद्दे पर देश के बड़े टीवी चैनलों पर भी लगातार गरमागरम बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच, माहौल को और अधिक विस्फोटक बनाने के इरादे से इंस्टाग्राम पर एक अज्ञात महिला का भड़काऊ AI वीडियो वायरल किया गया। इस वीडियो के सामने आते ही हड़कंप मच गया है, जिसे लेकर पुलिस ने अब बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
साजिश का पर्दाफाश: ‘वह मेरी बेटी नहीं, समाज में नफरत फैलाने का है खेल’
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब धर्मांतरण करने वाले युवक आयुष मलिक के पिता देवराज मलिक (निवासी मोहल्ला दयानंद नगर, शामली) ने खुद कोतवाली पहुंचकर इस वीडियो को एक सोची-समझी साजिश करार दिया। देवराज मलिक ने पुलिस को दी अपनी लिखित तहरीर में साफ-साफ कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह वीडियो पूरी तरह भ्रामक और झूठी है।
वीडियो में अज्ञात महिला रोने और भावुक होने का नाटक करते हुए आयुष मलिक को अपना भाई बता रही है। वह वीडियो में कह रही है कि ‘वह मर जाएगा, लेकिन कोई भी उसे मुस्लिम से हिंदू नहीं बना पाएगा, मेरे भाई को कोई परेशान न करे।’ आयुष के पिता ने पुलिस को बताया कि वीडियो में दिख रही यह महिला उनकी बेटी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की झूठी बातें फैलाकर समाज में हिंदू धर्म के प्रति घृणा पैदा करने और लोक शांति को पूरी तरह भंग करने की प्रबल संभावना है।
महंत स्वामी यशवीर महाराज की हुंकार के बाद एक्शन:
इस भ्रामक और जहरीले वीडियो के सामने आते ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रखर संत और योग साधना यशवीर आश्रम बघरा के महंत स्वामी यशवीर महाराज ने मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने इस मामले को हिंदू समाज को भ्रमित करने की एक सोची-समझी साजिश बताते हुए पुलिस प्रशासन से तत्काल मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई थी। स्वामी यशवीर महाराज के तीखे तेवरों और पीड़ित पिता की तहरीर के बाद शामली पुलिस तुरंत एक्शन में आई और मामले की गंभीरता को देखते हुए देर रात ही एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई।
इन गंभीर और गैर-जमानती धाराओं में कसा कानूनी शिकंजा:
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शामली कोतवाली पुलिस ने अज्ञात महिला के खिलाफ बेहद गंभीर और गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया है। पुलिस ने नए कानून के तहत कार्रवाई की है:
सबसे पहले, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 197(1)(c) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले झूठे और भ्रामक दावे करने से जुड़ी है।
इसके साथ ही, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353(1)(b) को भी इस एफआईआर में शामिल किया गया है, जिसका सीधा संबंध समाज में अफवाह फैलाने, लोक शांति को भंग करने और विभिन्न समुदायों के बीच धार्मिक घृणा पैदा करने वाले बयान जारी करने से है।
इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के जरिए इस भ्रामक एजेंडे को हवा देने के कारण सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 67 (IT Act) भी लगाई गई है, जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के जुर्म में लगाई जाती है।
साइबर सेल एक्टिव, पुलिस बोली- ‘माहौल बिगाड़ने वाले बख्शे नहीं जाएंगे’
शामली पुलिस प्रशासन का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माहौल किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। इस मामले में शामली पुलिस की साइबर सेल को एक्टिव कर दिया गया है, जो उस इंस्टाग्राम अकाउंट के आईपी एड्रेस (IP Address) और वीडियो के ओरिजिनल सोर्स को ट्रैक कर रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि वीडियो में दिख रही अज्ञात महिला और इसके पीछे काम कर रहे सिंडिकेट को जल्द ही बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।




