मुजफ्फरनगर: पर्यावरण के लिए नासूर बन चुके केमिकल गोदाम पर आखिरकार प्रशासन की गाज गिर ही गई। चरथावल रोड पर स्थित केमिकल प्लांट और गोदामों से फैल रहे जहर को लेकर ‘आई भारत’ द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर का बड़ा असर हुआ है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने त्वरित एक्शन लेते हुए ‘NR ट्रेडिंग’ नाम से संचालित हो रहे प्लांट और गोदाम को पूरी तरह सील कर दिया है।
खाली प्लॉट में ड्रम ही ड्रम, जेई राजा गुप्ता का छापा:
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई राजा गुप्ता के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जब मौके पर मुआयना किया, तो मंजर देख अधिकारी भी दंग रह गए। प्लांट के अंदर ही नहीं, बल्कि आसपास के खाली प्लॉट्स में भी सैकड़ों केमिकल ड्रम बिखरे पड़े थे। इसकी वजह से पूरे इलाके में रसायनों की इतनी तेज बदबू थी कि सामान्य रूप से सांस लेना भी मुश्किल हो चुका था। खुले में बिखरे केमिकल के कारण भूजल (Groundwater) के जहरीला होने की प्रबल आशंका जताई गई है।
कागजों के नाम पर ‘कोरा आश्वासन’, नहीं मिला कोई वैध लाइसेंस:
जब टीम ने प्लांट मालिकों से संचालन के लिए जरूरी एनओसी (NOC), प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और वैध लाइसेंस की मांग की, तो उनके पास दिखाने को कुछ नहीं था। हालांकि, मालिकों ने कुछ पत्रावलियां पेश कर टीम को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जांच में एक भी दस्तावेज संतोषजनक या कानूनी तौर पर सही नहीं पाया गया। मौके पर चारों तरफ ज्वलनशील पदार्थ बिखरा देख अधिकारियों ने सुरक्षा के लिहाज से तत्काल इसे सील करने का निर्णय लिया।
दो महीने पहले की ‘अग्निकांड’ से भी नहीं लिया सबक:
बता दें कि करीब दो महीने पहले इसी परिसर में भीषण आग लगी थी। उस वक्त घंटों तक आसमान काले धुएं से ढका रहा और कई लोग बीमार पड़ गए थे। इतने बड़े हादसे और जनहानि की आशंका के बावजूद मालिक बेखौफ होकर अवैध काम को अंजाम दे रहे थे। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आग लगने के बाद भी प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर यह खेल जारी रहा।
अजीबोगरीब दावा: मालिक को खुद नहीं पता क्या है केमिकल का नाम!
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि प्लांट प्रबंधक आज तक जिला प्रशासन या अग्निशमन विभाग को यह नहीं बता पाए हैं कि उन ड्रमों में कौन सा केमिकल भरा है। मालिकों ने तर्क दिया कि यह फैक्ट्रियों से निकला हुआ पुराना तेल (Used Oil) है, जिसे साफ करके ईंधन के रूप में सप्लाई किया जाता है। हैरानी की बात है कि अग्निशमन विभाग के नोटिस के बावजूद इसका वैज्ञानिक नाम या फॉर्मूला नहीं बताया गया। सफाई के बाद निकलने वाले खतरनाक वेस्ट (अपशिष्ट) को भी ईंट-भट्टों पर झोंकने की बात स्वीकार की गई है, जो पर्यावरण नियमों की खुली धज्जियां उड़ाना है।
इलाके के लोगों ने ली राहत की सांस:
इस बड़ी कार्रवाई के बाद चरथावल रोड के निवासियों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खबर चलने के बाद प्रशासन की नींद उड़ी। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में दोबारा वहां किसी भी प्रकार की गतिविधि पाई गई, तो मालिकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





