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मुजफ्फरनगर का ‘क्रूर’ फैक्टरी मालिक अंकित बालियान हरियाणा में गिरफ्तार, SIT को चकमा दे पलवल में तमंचे के साथ दबोचा गया

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मुजफ्फरनगर के बहुचर्चित मांडी दोना फैक्टरी कांड से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। फैक्टरी में मजदूरों को बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं देने और एक मजदूर की मौत के मामले में मुख्य आरोपी और फैक्टरी मालिक अंकित बालियान को गिरफ्तार कर लिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि जिस आरोपी को दबोचने के लिए यूपी पुलिस और SIT की 5 टीमें दिन-रात खाक छान रही थीं, उसे हरियाणा की पलवल पुलिस ने एक अवैध तमंचे के साथ धर दबोचा है।

मुजफ्फरनगर/पलवल: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद का सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाला ‘मांडी दोना फैक्टरी कांड’ का मुख्य आरोपी अंकित बालियान आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पिछले कई दिनों से फरार चल रहे अंकित को हरियाणा के जिला पलवल की होडल थाना पुलिस ने अवैध तमंचे के साथ गिरफ्तार किया है।

इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पलवल के एसएसपी से सीधे फोन पर बात की है और आरोपी को ‘बी वारंट’ (B-Warrant) पर मुजफ्फरनगर लाने की तैयारी शुरू कर दी है।

23 जून से थी तलाश, हरियाणा पुलिस की सूचना पर खुला राज

तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में स्थित दोना-पत्तल फैक्टरी में मजदूरों को बंधक बनाने और नेपाल निवासी मजदूर अर्जुन टोपी की गैर-इरादतन हत्या के मामले में अंकित बालियान मुख्य आरोपी है। पुलिस उसकी 23 जून से सरगर्मी से तलाश कर रही थी।

बुधवार देर शाम तितावी पुलिस को हरियाणा के होडल थाने से इनपुट मिला कि उन्होंने मांडी निवासी एक युवक को तमंचे के साथ पकड़ा है, जो अपना नाम अंकित बालियान बता रहा है। जब हरियाणा पुलिस ने उसका आपराधिक इतिहास खंगाला, तब जाकर इस बेहद शातिर और क्रूर आरोपी की हकीकत सामने आई।

आरोपी अंकित बालियान की पलवल में गिरफ्तारी की सूचना मिली है। वह वास्तव में वहां किसी वारदात के इरादे से था या मामला कुछ और है, इस पर पलवल एसएसपी से वार्ता की गई है। हम जल्द ही उसे बी-वारंट पर मुजफ्फरनगर लाएंगे। फैक्टरी से लापता दो अन्य मजदूरों के बारे में भी उससे सख्ती से पूछताछ की जाएगी।” –संजय कुमार वर्मा, एसएसपी, मुजफ्फरनगर।

क्या था पूरा ‘मांडी दोना फैक्टरी कांड’? (क्रूरता की पूरी कहानी)

मांडी गांव निवासी अंकित बालियान अपनी दोना-पत्तल फैक्टरी में देश के अलग-अलग राज्यों (राजस्थान, बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश) से गरीब मजदूरों को बहला-फुसलाकर लाता था। इसके बाद शुरू होता था प्रताड़ना का वो काला खेल, जिसने आधुनिक समाज में बंधुआ मजदूरी के खौफनाक दौर की याद दिला दी:

  • भूखा रखकर कराया जाता था काम: एक दर्जन से अधिक मजदूरों को फैक्टरी के भीतर बंधक बनाकर रखा गया था। उन्हें समय पर खाना तक नहीं दिया जाता था।
  • अमानवीय यातनाएं: दिन-रात काम कराने के साथ-साथ मजदूरों को बेरहमी से पीटा जाता था। इसी यातना के दौरान नेपाल निवासी मजदूर अर्जुन टोपी की मौत हो गई थी, जिसे छिपाने का प्रयास किया गया।
  • ऐसे फूटा था घड़ा: राजस्थान निवासी एक मजदूर विक्रम किसी तरह अपनी जान बचाकर फैक्टरी की दीवार लांघकर भागा और सीधे तितावी थाने पहुंचा। उसकी आपबीती सुन पुलिस के भी होश उड़ गए। इसके बाद पुलिस ने श्रम विभाग की टीम के साथ फैक्टरी पर छापा मारकर बाकी मजदूरों को ‘नरक’ से आजाद कराया।

पिता और सुपरवाइजर पहले ही जा चुके हैं जेल

पुलिस इस मामले में पहले ही तीन आरोपियों को जेल भेज चुकी है:

  • प्रदीप बालियान (फैक्टरी मालिक अंकित का पिता)
  • शिवा (निवासी उकावली, बुढ़ाना – फैक्टरी का सुपरवाइजर)
  • रबित (निवासी मांडी – मजदूरों को फंसाकर लाने वाला दलाल)

सभी मुक्त कराए गए मजदूरों को प्रशासन ने आर्थिक सहायता देकर उनके परिवारों के साथ सुरक्षित घर भेज दिया था, लेकिन मुख्य सरगना अंकित बालियान फरार था।

बड़े अपराधियों का ‘हरियाणा-नोएडा’ कनेक्शन: पुलिस की भूमिका पर सवाल!

जनपद के शातिर अपराधियों का दूसरे राज्यों या जिलों में गिरफ्तार होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। अतीत पर नजर डालें तो जब यूपी पुलिस का एनकाउंटर या सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ता है, तो अपराधी अक्सर ‘सुरक्षित रास्ते’ तलाशने लगते हैं। इससे पहले मुजफ्फरनगर का कुख्यात गैंगस्टर विक्की त्यागी भी वांछित रहने के दौरान नोएडा से गिरफ्तार हुआ था, जबकि वेस्ट यूपी का बड़ा माफिया सुशील मूंछ भी राजस्थान से दबोचा गया था। अब इसी फेहरिस्त में अंकित बालियान का नाम भी जुड़ गया है, जिसे हरियाणा के होडल (पलवल) से अवैध तमंचे के साथ पकड़ा गया है। इन तमाम मामलों में दूसरे राज्यों की पुलिस की भूमिका और अपराधियों के इस ‘सरेंडर’ पैटर्न को लेकर दबी जुबान में हमेशा गंभीर सवाल उठते रहे हैं।

अब आगे क्या?

मुजफ्फरनगर पुलिस के लिए अंकित बालियान की कस्टडी बेहद अहम है। उससे न सिर्फ नेपाल के मजदूर की मौत का राज उगलवाना है, बल्कि फैक्टरी से लापता दो अन्य मजदूरों का सुराग भी लगाना है। देखना होगा कि मुजफ्फरनगर पुलिस उसे कब तक रिमांड पर लेकर जनपद लाती है।

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