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एम.एम. इंटर कॉलेज के चुनाव में बड़ा खेल! फर्जी सदस्यता सूची और लल्ली देवी ट्रस्ट की ‘अवैध घुसपैठ’ का आरोप

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मुजफ्फरनगर: महामना मालवीय इंटर कॉलेज के प्रबंधकीय चुनाव को लेकर एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। ‘द ब्राह्मण ट्रस्ट (पंजीकृत), मुजफ्फरनगर’ की प्रबंध समिति ने एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और एक निष्कासित गुट पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए इसे संस्था को अवैध रूप से हथियाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। ट्रस्ट का दावा है कि नियमों को ताक पर रखकर सदस्यता रजिस्टरों में भारी हेराफेरी की जा रही है और पूर्व के अदालती आदेशों को दरकिनार किया जा रहा है।

खेल ’26 वास्तविक बनाम 25 फर्जी’ सदस्यों का

ब्राह्मण ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार, संस्था कानूनी रूप से सत्यापित केवल 26 वास्तविक सदस्यों की सूची के आधार पर संचालित होती है। वैध प्रबंध समिति ने इन्हीं 26 सदस्यों के साथ नियमानुसार चुनाव संपन्न कराकर परिणाम 27 जून 2026 को जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), मुजफ्फरनगर को भेज दिए हैं।

आरोप है कि सहायक रजिस्ट्रार (सहारनपुर) और DIOS मुजफ्फरनगर के कार्यालयों ने आपसी समन्वय कर मूल सूची को ही बदल डाला। वैध 26 सदस्यों में से 5 के नाम मनमाने ढंग से हटा दिए गए और एक निष्कासित व्यक्ति द्वारा पेश की गई 25 फर्जी नामों की सूची को अवैध रूप से जोड़ दिया गया।

बाहरी ‘लल्ली देवी ट्रस्ट’ की अवैध एंट्री!

प्रेस वार्ता में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह किया गया कि ब्राह्मण ट्रस्ट के 11 मौजूदा और वैध न्यासियों (Trustees) को सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 का खुला उल्लंघन करते हुए एक बाहरी संस्था, “लल्ली देवी ट्रस्ट” के 11 अवैध सदस्यों को इसमें शामिल कर लिया गया है। इसे सीधे तौर पर संस्था पर कब्जा करने की नीयत से की गई अवैध घुसपैठ बताया गया है।

कौन हैं महेश गौतम और क्या है पूरा सच?

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि इस समानांतर और अवैध चुनाव को कराने के पीछे महेश गौतम का हाथ है, जिनका अब ट्रस्ट से कोई कानूनी वास्ता नहीं है। सभी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद उन्हें 3 जनवरी 2025 को ही ब्राह्मण ट्रस्ट की प्राथमिक सदस्यता से स्थायी रूप से निष्कासित किया जा चुका है।

पुरानी खारिज सूची को जिंदा करने की कोशिश: जिस 25 सदस्यीय सूची का हवाला दिया जा रहा है, उसे साल 2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय और तत्कालीन सहायक रजिस्ट्रार ने जांच के बाद खारिज कर दिया था। इसके बाद साल 2024 में भी इस सूची को शामिल करने का प्रयास हुआ, जिसे प्रशासन ने फिर निरस्त कर दिया था।

2015 के ‘वित्तीय स्टे’ की हास्यास्पद व्याख्या और DIOS की भूमिका पर सवाल

ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि साल 2015 में उच्च न्यायालय ने महेश गौतम के खिलाफ ₹52,500/- की वित्तीय रिकवरी पर एक अंतरिम रोक (Stay) लगाई थी। लेकिन साल 2026 में वर्तमान सहायक रजिस्ट्रार ने इस वित्तीय आदेश की बेहद अजीबोगरीब व्याख्या करते हुए यह दावा कर दिया कि कोर्ट ने इन 25 अवैध लोगों को सदस्य बनाने की अनुमति दी थी।

इसके बाद सहायक रजिस्ट्रार ने गेंद DIOS के पाले में डाल दी। ट्रस्ट का कहना है कि सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत DIOS के पास किसी पंजीकृत सोसाइटी की सदस्यता तय करने या बदलने का कोई कानूनी अधिकार (Ultra Vires) नहीं है। DIOS केवल सहायक रजिस्ट्रार से प्राप्त सत्यापित सूची पर चुनाव कराने के लिए बाध्य हैं, न कि खुद सदस्यता की वैधता तय करने के लिए।

वित्तीय नुकसान और आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला

प्रेस नोट के अनुसार, महेश गौतम पर भूमि धोखाधड़ी और गबन के गंभीर आरोप हैं और वे FIR संख्या 1382/14 व FIR संख्या 1015/17 में मुख्य आरोपी हैं। इसके अलावा, ट्रस्ट की 50 व्यावसायिक दुकानों के किराया समझौतों को रोकने के उनके अड़ियल रुख के कारण ट्रस्ट को हर साल ₹60 लाख का भारी नुकसान हो रहा है। उन पर साल 2023 में मूल कैशबुक नंबर 3 चोरी करने का भी आरोप है।

शासन और प्रशासन से ट्रस्ट की तीन बड़ी मांगें:

  1. अवैध चुनाव निरस्त हो: वित्तीय आदेश की गलत व्याख्या और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग पर आधारित इस समानांतर चुनाव को तुरंत खारिज (Quash) किया जाए।
  2. वैध चुनाव को मंजूरी मिले: 26 वास्तविक सदस्यों की मूल सूची के आधार पर दाखिल किए गए प्रबंध समिति के चुनाव परिणामों को आधिकारिक रूप से स्वीकृत किया जाए।
  3. उच्च स्तरीय विजिलेंस जांच हो: कोर्ट के आदेशों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और नियमों की अनदेखी करने वाले स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय सतर्कता जांच कराई जाए।

एम.एम. इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर की साख से जुड़े इस मामले में अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर विवाद पर क्या रुख अपनाता है।

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