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बिना दवा के दूर होंगी साइनस, चश्मा और बालों की समस्या! योगाचार्य सुरेंद्र पाल ने खोले ‘शुद्धि क्रिया’ के राज

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–ग्रीनलैंड मॉडर्न जूनियर हाई स्कूल में विशेष योग साधना शिविर का आयोजन, साधकों ने सीखीं जलनेति और कुंजल क्रियाएं

मुजफ्फरनगर: भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ते लाइफस्टाइल के बीच खुद को सेहतमंद रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी कड़ी में भारतीय योग संस्थान द्वारा एक शानदार पहल की गई। संस्थान के निशुल्क योग साधना केंद्र, ग्रीनलैंड मॉडर्न जूनियर हाई स्कूल में एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं जनपद प्रभारी योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य के निर्देशन में साधकों को शरीर के शुद्धिकरण (शुद्धि क्रियाएं) के गुर सिखाए गए।

क्यों जरूरी हैं शुद्धि क्रियाएं? (योगाचार्य के अनुसार)

शिविर के दौरान योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने साधकों को संबोधित करते हुए शुद्धि क्रियाओं के चमत्कारी फायदों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ये क्रियाएं हमारे शरीर के ऊपरी हिस्से (आँख, नाक, कान और गला) को पूरी तरह डिटॉक्सिफाई यानी स्वच्छ करने में सहायक हैं।

नियमित अभ्यास से मिलते हैं ये बड़े फायदे

  • साइनस और एलर्जी से मुक्ति: नाक में मांस का बढ़ना, नाक की हड्डी का बढ़ना, बार-बार छींक आना, नजला-जुकाम और साइनस जैसी पुरानी बीमारियों में यह रामबाण है।
  • आंखों की रोशनी में सुधार: इन क्रियाओं के नियमित अभ्यास से आंखों की ज्योति बढ़ती है।
  • एंटी-एजिंग और सुरीली आवाज: समय से पहले बालों का सफेद होना रुकता है और आवाज में मधुरता आती है।
  • इम्यूनिटी बूस्टर: कुंजल क्रिया शरीर में वात, पित्त और कफ (त्रिदोष) को संतुलित रखती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) तेजी से बढ़ती है।

एक्सपर्ट्स ने लाइव करके दिखाया ‘जलनेति और कुंजल’ का प्रदर्शन

इस शिविर की सबसे खास बात यह रही कि यहां केवल थ्योरी नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल करके दिखाया गया। योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने खुद कुंजल क्रिया, रबर नेति, सूत्र नेति और जल नेति का लाइव प्रदर्शन कर साधकों की हर शंका को दूर किया और इसे करने का सही तरीका सिखाया।

शिविर में युवा योग शिक्षक अंकुर मान, मांगलिका और कंचन सहित अन्य वरिष्ठ साधकों ने उत्साहपूर्वक नेति क्रिया का अभ्यास किया। योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य योग और इन प्राचीन शुद्धि क्रियाओं के माध्यम से समाज को बिना दवाओं के स्वस्थ और ऊर्जावान बनाना है। शिविर में भारी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भाग लेकर स्वास्थ्य लाभ लिया।

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