मुजफ्फरनगर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खेल संस्कृति में आज एक नया इतिहास रच गया! ग्रामीण अंचल के छिपे हुए हुनर को वैश्विक मंच देने के संकल्प के साथ स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल, मंसूरपुर के विशाल खेल मैदान में ‘ईशाग्रामोत्सव’ का ऐसा धमाकेदार आगाज़ हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में खेल का रोमांच और जूनून भर दिया है। मैदान गवाह बना उस पल का, जब अपनी माटी के लाल और बेटियां खेल के मैदान में अपना जौहर दिखाने उतरे।

दिग्गजों का जमावड़ा: डा. संजीव बालियान और संजय राठी ने भरा जोश
इस ऐतिहासिक खेल महाकुंभ का बिगुल फूंकने के लिए सियासत और खेल जगत की नामचीन हस्तियां मैदान में मौजूद रहीं। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने खिलाड़ियों की हौसलाअफजाई की। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल के संस्थापक संजीव राठी और रालोक (RLD) के जिला अध्यक्ष संजय राठी ने कार्यक्रम में शिरकत कर समां बांध दिया।
अतिथियों की फेहरिस्त में जिला क्रीड़ा अधिकारी भूपेंद्र सिंह यादव, इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य समिति के अध्यक्ष कैप्टन डॉक्टर प्रवीण चौधरी, नीरज बालियान और डॉ. राजीव कुमार जैसे दिग्गजों ने मंच संभाला।
“अब कोई हुनर पीछे नहीं छूटेगा” – खेल मैदान से हुंकार
खिलाड़ियों में जोश फूंकते हुए रालोद जिला अध्यक्ष संजय राठी और जिला क्रीड़ा अधिकारी भूपेंद्र सिंह यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि “यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की दबी हुई प्रतिभाओं को मुख्यधारा में लाने का एक क्रांतिकारी अभियान है। ईशा फाउंडेशन ने ग्रामीण भारत के युवाओं की रगों में दौड़ते खेल के जुनून को पहचानकर जो मंच दिया है, वह मील का पत्थर साबित होगा। अब गांवों का हुनर महलों में नहीं, बल्कि खेल के मैदानों से सीधे दुनिया के सामने चमकेगा!”

संस्कृति और कला का अद्भुत संगम: झूम उठा स्प्रिंग डेल्स स्कूल
खेलों की शुरुआत जितनी आक्रामक थी, सांस्कृतिक आगाज़ उतना ही भावुक और खूबसूरत रहा। स्प्रिंग डेल्स स्कूल के बच्चों ने अपनी सुरीली आवाज में अभिनंदन गीत गाकर मेहमानों का स्वागत किया। इसके ठीक बाद, स्कूल की बालिकाओं ने जब अपनी थाप और ऊर्जावान लोक नृत्य की प्रस्तुति दी, तो पूरा खेल मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
दक्षिण भारत की 17 साल की तपस्या अब यूपी में: मुजफ्फरनगर को मिली बड़ी मेज़बानी!
यह आयोजन कोई आम आयोजन नहीं है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और आत्मज्ञानी सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी की दूरदर्शी सोच के तहत पिछले 17 सालों से यह उत्सव दक्षिण भारत के 250 से अधिक स्थानों पर ग्रामीण जीवन में ऊर्जा भर रहा है, लेकिन इस बार इतिहास बदला है:
- उत्तर भारत में पहली एंट्री: ईशा फाउंडेशन ने इस बार पहली बार उत्तर भारत का रुख किया है, जिसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को चुना गया।
- यूपी का ‘पावर सेंटर’ बना मुजफ्फरनगर: पूरे उत्तर प्रदेश में मात्र 5 जिलों को यह गौरव मिला, जिसमें मुजफ्फरनगर सबसे आगे खड़ा है।
- 45 टीमों का महामुकाबला: मुजफ्फरनगर के इस कलस्टर में बिजनौर, शामली और सहारनपुर की टीमों को शामिल किया गया है। कुल स्वीकृत 56 टीमों में से 45 टीमों ने सीधे मैदान पर रिपोर्ट कर जंग का ऐलान कर दिया है।
रस्सा-कशी और जूट बैग रेस: जब मैदान में टकराईं ताकतें
मुख्य खेलों के साथ ही ‘फन गेम्स’ के रोमांच ने दर्शकों की सांसें रोक दीं। जब रस्सा-कशी (Tug of War) का मुकाबला हुआ, तो दोनों ओर से खिलाड़ियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। धूल उड़ते मैदान और जीत के लिए मचे हाहाकार ने रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया। इसके साथ ही जूट बैग रेस (बोरा दौड़) में भी खिलाड़ियों ने गजब का संतुलन और गति दिखाकर सबको दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
पर्दे के पीछे के असली हीरो: ईशा वॉलंटियर्स
इस बेहद बड़े और भव्य आयोजन को बिना किसी रुकावट के अनुशासित ढंग से सफल बनाने में ईशा फाउंडेशन के जांबाज वॉलंटियर्स की फौज दिन-रात डटी रही। अजय अग्रवाल, दीपक शर्मा, प्रवेन्द्र दहिया, विवेक कुमार, विनय गर्ग, फूल कुमार, मुकेश गुप्ता और सुघोष आर्य सहित दर्जनों वॉलंटियर्स ने व्यवस्था का मोर्चा संभाले रखा।




