मुजफ्फरनगर: जनपद की सियासत से इस वक्त की बड़ी और गर्मागर्म राजनीतिक खबर सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी के भीतर मचे घमासान और गुटबाजी की चिंगारी अब सरेआम सुलग उठी है। सपा के वरिष्ठ नेता साजिद हसन ने सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए उनके दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। साजिद हसन ने जिलाध्यक्ष द्वारा उन्हें पद से हटाने की खबर को ‘सरासर फर्जी’ करार देते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी को एक खास नेता के यहाँ गिरवी रख दिया गया है।
“मैंने 11 जून को ही छोड़ दिया था पद, हटाने की खबर फर्जी”
सपा नेता साजिद हसन ने एक बेहद तीखा प्रेस बयान जारी कर मुजफ्फरनगर सपा की अंदरूनी खींचतान को सरेआम कर दिया। उन्होंने कहा कि “सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी द्वारा मुझे जिला मीडिया प्रभारी पद से हटाने की जो खबर फैलाई जा रही है, वह बिल्कुल फर्जी है। असलियत यह है कि मैंने बीते 11 जून 2026 को ही खुद इस पद से इस्तीफा दे दिया था।”
साजिद हसन ने साफ किया कि जिलाध्यक्ष को सिर्फ नए मीडिया प्रभारी के नाम का ऐलान करना था, लेकिन अपनी भड़ास निकालने और अपमानित करने की नीयत से उन्होंने ‘पद से हटाने’ की झूठी घोषणा की है।
“एक आका के इशारे पर चल रहे जिलाध्यक्ष, 70% कार्यकर्ता दूर हुए”
जिलाध्यक्ष जिया चौधरी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए साजिद हसन ने बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की नीतियों और निर्देशों के विपरीत काम कर रहे हैं।
- पार्टी गिरवी रखने का आरोप: साजिद हसन का सीधा आरोप है कि सबको साथ लेकर चलने के बजाय जिलाध्यक्ष जिया चौधरी मुजफ्फरनगर में समाजवादी पार्टी को एक खास ‘आका नेता’ के इशारे पर चला रहे हैं और पार्टी को उनके यहाँ गिरवी रख दिया है।
- 70 फीसदी कार्यकर्ता नाराज: उन्होंने दावा किया कि जिलाध्यक्ष पार्टी हित में नहीं, बल्कि सिर्फ एक नेता के हित में काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से जिले के 70 प्रतिशत जमीनी कार्यकर्ता पार्टी से दूर हो चुके हैं।
अखिलेश यादव के दरबार में गूंजेगा मामला
इस सियासी दंगल को साजिद हसन यहीं थामने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह जिलाध्यक्ष और उस ‘खास नेता’ द्वारा पार्टी को अपनी बपौती समझने के इस पूरे खेल का पर्दाफाश करेंगे। साजिद हसन जल्द ही इस पूरे मामले को लेकर लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने अपना पक्ष रखेंगे और जिले की जमीनी हकीकत से उन्हें रूबरू कराएंगे।
अब देखना यह है कि इस करारे पलटवार के बाद जिलाध्यक्ष जिया चौधरी और उनके खेमे की तरफ से क्या जवाब आता है, लेकिन इस ‘लेटर वॉर’ ने मुजफ्फरनगर की सियासी तपिश को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।




